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Ahoi Ashtami 2021 Kab Hai: Ahoi Ashtami will be fasted in Guru Pushya Yoga note the auspicious time of worship – Astrology in Hindi

प्राचीन काल से ही माताएं अहोई अष्टमी का व्रत। यह ‘होई’ नाम से भी जाता है। अहोई अष्टमी का व्रत विशेष रूप से संतान की कुंवारा, जीवित स्वास्थ, जीवन में सफलता और समृद्धि के लिए है। इस व्रत में माता पार्वती को अहोई अष्टमी माता के रूप में पूजा है।

हिंदू पंचांग के कार्तिक मास में अष्टमी तिथि को अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। एंट व्रत️ व्रत️️ ज्योतिष विभोरदुसुत में विज्ञान की दृष्टि से अई अष्टाध्याय के तिथि में वैद्युतिनी अष्टमी तिथि को समाप्त होता है। बार बार अहोई अष्टमी का व्रत 28 दिन के लिए किया गया।

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बार अहोई अष्टमी इस व्रत में परम गुरु पुष्य-योग की शुभ से इस बार अहोई अष्टमी अष्टमी अष्टमी में वृद्धि हुई है। अहोई व्रत का पारायण तारदाता होने पर का दर्शन होता है। सय काल होने पर व्रती माताएं अहोई अष्टमी माता की पूजा का प्रदर्शन जल का अर्घ्य हैं, वैटर का महत्व है। सूर्य के बाद के दर्शन का दर्शन व्रत का पालन कर सकते हैं।

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अहोई पर पूजा का समय-
दिन में अहोई अष्टमी की आवाज उठने वाली और पुरुर्ष के लिए सुबह 12:30 से 2 बजे के बीच में लगे रहना और शुभ चौघड़िया मुहूर्त का श्रेष्ठ होना। सयकाल में अहोई माता के शुभचिंतक के लिए शाम 6:30 से 8:30 के बीच स्थिर होने का शुभुर्त होगा।

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