Panchaang Puraan

5th navratri skandmata puja shardiya navratri 2021 puja vidhi shubh muhrat aarti and mantra lyrics – Astrology in Hindi

पांचवी नवरात्रि : आजावी नवरात्रि है। माता-पिता की देखभाल के लिए आवश्यक है। पांचवी की छुट्टी पर पंचवीय स्वरूप कार्यमाता-पश्चर्य की स्थिति है। स्कंद की माता होने के बाद यह स्कंदमाता नाम से जाना जाता है। अपने माता-पिता के नाम के साथ मेल करें। माँ की उपासना से नकारात्मक शक्तियों का नाश है। माँ की कृपा से काम भी। स्कंदमाता स्तोत्र पाठ, कोच और आरती अवश्य करें।

इन शुभ मुहूर्तों में करें स्कंदमाता की पूजा-

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:40 ए एम से 05:29 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त – 11:45 ए एम से 12:31 पी एम
  • विजय मुहूर्त – 02:04 पी एम से 02:51 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त – 05:45 पी एम से 06:09 पी एम
  • सूर्य योग – 02:44 पी एम से 07:54 पी एम

मकर, मकर, धनु, मिथुन, राशि चक्र में शामिल हों ये छोटे सा उपाय, शनि के वास करने वाले से मुक्तिदाता

स्तोत्र पाठ

नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।

समग्रतत्वसागररमपारपार पार्कम्॥

शिवाप्रभा समुज्जवलं स्फुच्छ्शागशेखरम्।

ललटरत्नभास्करं जगत्प्रीन्तिभास्करम्॥

महेन्द्रकश्यपर्चिता सन्तकुमाररसस्तुताम्।

सुरसुरेंद्रवन्दिता असल निर्मलादभुताम्॥

अतर्क्यरोचिरूविजांरूद्ध दोषवर्जिताम्।

मुक्षुभिरविचिन्तता विशेषतत्वमुचिताम्॥

नानलंकार भूभागं मृगेंद्रवाहनाग्रजाम्।

सुशुध्दत्वतोसंस्थां त्रिवेन्दमारभुषताम्॥

सुधारनामिकौपकारिणी सुरेंद्रकौरीधर्मिनीम्।

शुभं पुष्पमालिनी सुकर्णकल्पशाखीम्॥

तमोहनकार्यामिनी शिवस्वभाव कामिनीम्।

सहस्त्रसूर्यराजिका धनज्ज्योगकारिकाम्॥

सुशुध्द काल कन्दला सुभवृन्दमजल्लुलम्।

प्रजायिनी प्रजावति नमः मातरं सतीम्॥

स्वकर्मकारिणी गति हरिप्रयाच पार्वतीम्।

शक्तिशक्ति कांतिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥

पुर्नर्जगद्वितं नाममम् यह सुरार्चिताम्।

जयेश्वरी त्रिलोचने प्रसीद देवीपाहिमाम्

कच

ऐं बीजालिस्टा देवी पद युग्म घरापरा।

हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेय्युता॥

श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।

सर्वांग में सदा पातु स्कंदमाता

वानवपणमृते हुं फाईट बीजा।

उत्तरस्या औरग्नेव वारुणे नतेअवतु॥

इंद्राणां भैरवी चैत्यतांगी च संहारिणी।

सर्वदा पातु माता देवी चान्यान्यासु हि दीक्षु वै

रहस्यमयी स्वभाव के लेकिन हर काम में परफेक्ट होते हैं ये राशि वाले, किस्मत के भी होते हैं धनी

स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो अस्कंध माता

पांचवा नाम का विश्वास

के मन की जान हरि

जग जननी सब की महतारी

तेरे ज्योत जलता रेहू मै

हरदम. धधता रहू मै

मिह नामो से कहूं

मुझे एक है

पर्वतारोहण

स्थिति में

हर मंदिर मै तेरे नजारे

गुणी गुणी

भगत अपनी मर्ज़ दो

शक्ति मेरी पत्नी दो

इंदर आदी देवता मिलन

करेदर रोगे

प्रमुखों ने स्वागत किया

तुम ही खंडा हातेल उठो

दासो को सदा के लिए

‘भक्त’ की ओस पुरजाने आई

.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button